Tuesday, 24 April 2018

मिनिमम अकाउंट बैलेंस रखने पर भी देना होगा चार्ज? खत्म हो सकती है मिल रही छूट

नई दिल्ली: मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर बैंक आपसे चार्ज वसूलते हैं. लेकिन, अब मिनिमम बैलेंस रखने पर भी हो सकता है आपसे चार्ज वसूला जाए. दरअसल, आपके अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखने के बाद भी एटीएम ट्रांजैक्शन, फ्यूल सरचार्ज रिफंड, चेक बुक, डेबिट कार्ड आदि की सेवाएं फ्री नहीं मिल पाएंगी. टैक्स डिपार्टमेंट ने देश के बड़े बैंकों से ग्राहकों को दी जाने वाली मुफ्त सेवाओं पर टैक्स चुकाने को कहा है. इन बैंकों में एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा जैसे बड़े बैंक शामिल हैं. टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स पिछली तारीख से मांगा है, जो हजारों करोड़ रुपए का हो सकता है.

क्या है बैंकों के लिए चिंता
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, बैंकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह ग्राहकों से पांच साल के टैक्स की डिमांड नहीं कर सकते. हालांकि, अगर इस टैक्स को लगाया जाता है तो आगे चलकर इसका बोझ सीधे तौर पर ग्राहकों को उठाना पड़ेगा. बैंकों के पास विकल्प है कि वह DGGST की डिमांड को चुनौती दे सकते हैं. बैंक इस मामले में सरकार से भी अपील करेंगे. यह जानकारी एक ऐसे बैंक के अधिकारी ने दी है, जिसे यह नोटिस मिला है. अधिकारी ने बताया, ‘कुछ नोटिस इशू किए गए हैं और कुछ भेजने की तैयारी हो रही है. जिन बैंकों ने ये चार्ज वसूले हैं, उन सबको कारण बताओ नोटिस भेजा जा रहा है.’

6 हजार करोड़ की बैंकों पर देनदारी
एक्सिस बैंक के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें यह नोटिस मिला है. हमारी समझ से यह पूरी इंडस्ट्री के लिए मसला है. कारण बताओ नोटिस में जिन बातों का जिक्र किया गया है, हम उन पर अभी एक्सपर्ट्स से सलाह ले रहे हैं.’ इस नोटिस में जीएसटी के लॉन्च पीरियड को भी कवर किया गया है, जब सर्विस टैक्स सिस्टम लागू था.’ इस अधिकारी ने बताया कि बैंकों पर कुल टैक्स लायबिलिटी 6,000 करोड़ रुपये की हो सकती है, लेकिन बैंकों का मानना है कि वास्तविक रकम इससे ज्यादा होगी.


Source:-Zeenews

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Saturday, 21 April 2018

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बताया, देश में इसलिए हुई कैश की किल्लत

नई दिल्ली : कर्नाटक में आयकर विभाग ने कुल 4.13 करोड़ रुपये की बरामदगी की है. इसमें से 97 प्रतिशत राशि 2,000 और 500 रुपये के नोटों के तौर पर है. राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं. यह जानकारी उस वक्त सामने आई है कि जब हाल ही में देश में कई स्थानों पर नकदी का संकट सामने आया था. कई स्थानों पर एटीएम में पैसे नहीं थे. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने हाल ही में अपनी जांच इकाइयों से कहा था कि वे इन गतिविधियों पर नजर रखें. कनार्टक में इस कदम के नतीजे सामने आए हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उम्मीद जताई कि नकदी कर्नाटक भेजी जा रही है.

4.42 किलोग्राम सोना भी बरामद
विभाग ने कहा, ‘चुनाव प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और ऐसे में बेंगलुरू में विभाग की जांच शाखा ने 4.13 करोड़ रुपये की नकदी और 4.42 किलोग्राम सोने के गहने बरामद किए हैं.’ उसने कहा, ‘इन बरामदगी का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ज्यादातर नकदी 2,000 और 500 रुपये के नोटों के रूप में बरामद किए गए.’ बीते 27 मार्च को राज्य में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने के बाद से ये बरामदगी की गई है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में नकदी की कमी की खबरें हैं, ऐसे में यही लगता है कि नकदी कनार्टक में भेजी जा रही है. कर्नाटक में 12 मई को मतदान होगा.

दावा, 90 फीसदी एटीएम में कैश मौजूद
भारतीय प्रतिभूति मुद्रण और मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) के चारों छपाईखाने औसतन 18 से 19 घंटे काम करते हैं. लेकिन, नकदी की अचानक बढ़ी मांग और एटीएम मशीनों में नकदी खाली होने से यह छपाईखाने हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे काम कर रहे हैं. कैश की किल्लत के बीच सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में एटीएम काम कर रहे हैं और उनमें कैश भी उपलब्ध है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, नॉर्थ ईस्ट, ओडिशा, तमिलनाडु के 90 फीसदी एटीएम में कैश मौजूद है.

Source:-Zeenews

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Thursday, 19 April 2018

नोटबंदी से लेकर नोटमंदी तक, केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक में जारी है मतभेद?

देश में नोटबंदी के झटके के बाद करेंसी संचार को लेकर आम आदमी को दूसरा झटका लगा है. इस झटके में जहां 6 से 7 राज्यों में एटीएम खाली हो गए और देशभर में एटीएम से कैश निकालने की होड़ लग गई वहीं एक बार फिर वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बयानों से आपसी तालमेल की झलक दिखने लगी.

बुधवार को जैसे ही सोशल मीडिया में करेंसी क्रंच का कीवर्ड ट्रेंड करने लगा आनन फानन में वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक, सरकारी बैंक और आर्थिक सलाहकारों समेत कई स्तर से मामले पर सफाई का दौर शुरू हो गया. केंद्र सरकार की तरफ से पहले वित्त मंत्रालय से सफाई दी गई कि करेंसी का कोई संकट नहीं है. लेकिन जिन इलाकों में इस संकट का दावा किया जा रहा है वहां जल्द से जल्द राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है.

गौरतलब है कि वित्त राज्य मंत्री की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस तक कई राज्यों में अप्रत्याशित कैश निकासी का जिक्र नहीं किया गया. इस निकासी का जिक्र दोपहर बाद तब हुआ जब एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार ने दावा किया कि जहां आमतौर पर एक महीने के दौरान देश में 20,000 करोड़ रुपये की निकासी बैंकिंग से की जाती है, महज अप्रैल के पहले दो हफ्तों के दौरान कुल 45,000 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है. इसके चलते कुछ राज्यों में एटीएम खाली हो गए हैं हालांकि दावा किया गया कि सरकार जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य कर लेगी.

खास बात है कि इन सभी संवादों के बीच एक बात बार-बार कही गई कि देश के सरकारी खजाने में पर्याप्त मात्रा में करेंसी उपलब्ध है. इसके बावजूद बुधवार दोपहर बाद केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि उसने रिजर्व बैंक को जल्द से जल्द 500 रुपये की मुद्रा की प्रिंटिंग शुरू करने का निर्देश दे दिया है. सवाल खड़ा होता है कि जब दोपहर तक सरकार और केंद्रीय बैंक के आकलन में पर्याप्त मात्रा में करेंसी उपलब्ध थी फिर क्यों तेज रफ्तार से करेंसी की प्रिंटिंग का फरमान दिया गया?

क्या एक बार फिर नोटबंदी के दौर की तरह इस करेंसी क्रंच के समय वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच संवाद में कोई कमी थी या फिर दोनों ही संस्थाएं एक ही मसले को सुलझाने की कोशिश एकांत में कर रहे थे? यदि ऐसा है तो क्या वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक में ऐसी संवादहीनता इन संस्थाओं को किसी छोटे-बड़े आर्थिक संकट से निपटने में कमजोर नहीं कर रही है?


Source:-Aajtak

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Thursday, 12 April 2018

जिस IAS की मोदी ने की तारीफ, खुद साफ करते हैं शौचालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में एक रिटार्यड आईएएस ऑफिसर की जमकर तारीफ की. इस आईएएस अफसर का नाम है परमेश्वर जी. अय्यर. मोदी ने कहा कि अय्यर खुद शौचालय साफ करते हैं और वे अमेरिका से नौकरी छोड़कर आए हैं. असल में अय्यर ने स्वच्छ भारत मिशन को हेड करने के लिए अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़ दी थी. वे 1981 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अफसर रहे हैं. उन्होंने 7 साल पहले ऐच्छिक रिटायरमेंट ले लिया था. आगे जानें अय्यर की और खास बातें...

उन्होंने वर्ल्ड बैंक के स्वच्छता अभियान में काम किया. मोदी उनके काम से इतने खुश हैं कि जब उन्होंने स्टेज पर अय्यर को नहीं पाया तो उन्होंने भीड़ में अफसर की ओर कैमरा करने को कहा.

अय्यर को पानी आपूर्ति और सेनिटेशन सेक्टर में 20 साल से अधिक काम करने का अनुभव है. उन्हें जल सूरज प्रोग्राम के लिए जाना जाता है.

बता दें कि अय्यर भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए काम कर रहे हैं. सरकार ने उन्हें पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय में सचिव के तौर पर अमेरिका से वापस बुलाया था.

अय्यर सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहते हैं और स्वच्छता अभियान से जुड़े अपडेट लगातार करते हैं.

Source:-Aajtak

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Tuesday, 10 April 2018

बदायूं: BSP नेता की ही पसंद थी अंबेडकर की भगवा मूर्ति

बदायूं में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद नई मूर्ति जब भगवा रंग में लगी नजर आई तो बवाल मच गया. एक बार फिर योगी सरकार कटघरे में आई क्योंकि इस बार बदली गई मूर्ति का रंग भगवा था. इससे पहले कि मामला साफ होता बवाल बढ़ चुका था, लेकिन सच्चाई सामने आई तो पता लगा कि मूर्ति तोड़े जाने के बाद प्रशासन ने बीएसपी के स्थानीय नेताओं से मदद ली थी और बीएसपी के जिलाध्यक्ष ने नई मूर्ति के रूप में भगवा रंग में रंगी मूर्ति को पसंद किया था, जिसे आगरा से मंगवा कर लगवाया गया था और इसमें स्थानीय लोगों की सहमति भी थी.

ये है पूरा मामला

बदायूं के कुंवरगांव में कुछ शरारती लोगों ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया था जिसे दोबारा स्थापित किया गया. लेकिन इस बार नई प्रतिमा नीले रंग की जगह भगवा रंग की लगाई गई. अंबेडकर के कपड़ों को भगवा रंग में रंगा गया था.

बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर हमलावर है और कह रही है कि बीएसपी ने भगवा रंग की प्रतिमा चुनी, लेकिन इल्जाम योगी सरकार पर लगाया गया. बीजेपी के प्रवक्ता चन्द्रमोहन ने कहा कि इसमें प्रशासन का कोई रोल नहीं है. ऐसे में ये सरकार को बदनाम करने की साजिश है. सवाल ये है कि आखिरकार जब मूर्ति टूटी तो प्रशासन ने मूर्ति खुद क्यों नहीं लगवाई और क्यों राजनीतिक पार्टियों की मदद से ये मूर्ति लगवाई गई.

Source:-Aajtak

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Sunday, 8 April 2018

पेंशनर्स को मिलेगी 40 हजार रुपये तक की टैक्स छूट, ऐसे मिलेगा फायदा

आयकर विभाग उन लोगों को 40 हजार रुपये की टैक्स छूट देगा, जो अपनी पूर्व कंपनी से पेंशन ले रहे हैं. आयकर विभाग ने इस संबंध में सफाई जारी करते हुए कहा है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 16 में संशोधन किया गया है.

आयकर विभाग ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अगर अपनी पूर्व कंपनी से पेंशन मिल रही है, तो उसे 40 हजार रुपये या फिर पेंशन की पूरी रकम पर टैक्स  छूट मिलेगी. दोनों में से जो भी रकम कम होगी, उसी के आधार पर यह छूट दी जाएगी.

सीबीडीटी ने इस संबंध में सफाई जारी की है. पेंशन की रकम या 40 हजार रुपये (जो भी कम होगी) को व्यक्ति की कुल रकम के साथ जोड़ा जाएगा. इसके आधार पर ही उस व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम तय होगी.

Source:-Aajtak

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Saturday, 7 April 2018

मायावती का शाह को जवाब- आपराधिक मानसिकता से मजबूर, बोल रहे 'संघी' भाषा

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की विपक्षी पार्टियों को लेकर की गई टिप्पणी पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखा पलटवार किया है. मायावती ने उनके बयान की निंदा करते हुए कहा कि बीजेपी सत्ता के अहंकार में जनता को मूर्खों की जमात समझने की भूल कर रही है.

बीजेपी का स्तर नीचे गिरा

मायावती ने कहा कि गोरखपुर और फूलपुर में हार मिलने के बावजूद बीजेपी के बड़े नेता अपनी आपराधिक मानसिकता और संघी चाल के आगे मजबूर नजर आ रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया. मायावती ने कहा, 'अमित शाह का बयान दिखाता है कि गुरु (नरेंद्र मोदी) और शिष्य (अमित शाह) के नेतृत्व में बीजेपी का स्तर किस हद तक नीचे गिर गया है.'

ये था अमित शाह का बयान

बीजेपी के स्थापना दिवस पर 6 अप्रैल को मुंबई में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा था, '2019 (चुनाव) के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. विपक्षी एकजुटता की कोशिश हो रही है. जब भारी बाढ़ आती है तो सब कुछ बह जाता है. केवल एक वटवृक्ष बचता है और बढ़ते पानी से खुद को बचाने के लिए सांप, नेवला, कुत्ते और बिल्लियां और अन्य जानवर साथ आ जाते हैं. ' उन्होंने कहा था, 'मोदी बाढ़ के कारण सभी बिल्ली, कुत्ते, सांप और नेवला मुकाबला करने साथ आ रहे हैं.'

अमित शाह के इस बयान की कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने भी निंदा की है. विपक्षियों का कहना है कि अमित शाह राजनीतिक चर्चा को एक 'नए निचले स्तर' पर ले गए हैं.

Source:-Aajtak

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Friday, 6 April 2018

बिहारः शराब बंदी के 2 साल पूरे, नीतीश कुमार ने कहा- 'वोट' नहीं 'वोटरों' की चिंता

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां गुरुवार को कहा कि उन्हें 'वोट' नहीं 'वोटरों' की चिंता है. उन्होंने शराबबंदी की आलोचना करने वाले विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग मानव श्रृंखला में हाथ से हाथ जोड़कर खड़े थे, वे अब शराबबंदी के खिलाफ बोल रहे हैं. यह कैसी नैतिकता है? बिहार में शराबबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें वोट नहीं वोटरों की चिंता है.  उन्होंने दावा करते हुए कहा कि शराबबंदी से समाज में बड़ा बदलाव हुआ है.

बिहार में शराब बंदी के 2 साल पूरे
बिहार में शराब बंदी के दो साल पूरे हो गए है. शराब बंदी के दो साल पूरे होने पर नीतीश सरकार ने खुशी जाहिर करते हुए एक विशेष आयोजन किया गया. इस आयोजन के मुख्य अतिथि नीतीश कुमार थे. शराब बंदी के दो साल पूरे होने पर सीएम नीतीश कुमार ने खुशी जाहिर की, और उन्होंने इसे प्रदेश में सफल बताया. उन्होंने कहा कि इससे पूरे प्रदेश की कायाकल्प हुई है. सबसे अधिक बिहार की महिलाओं को खुशी मिली है. जिनके घर में शराब पीने वाले लोग रहते थे. जिससे वह काफी परेशान थी. लेकिन अब वह काफी खुश हैं.

नीतीश कुमार ने इस आयोजन पर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. इसके अलावा शराब बंदी पर होने वाले राजनीतिक बयान पर चुटकी भी ली. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा मुझे बहुत हंसी आती है, जब मैं समाचार पत्रों में शराब बंदी पर राजनेताओं के बयान पढ़ता हूं. उन्होंने कहा कि पता नहीं आजकल उन लोगों को क्या हो गया है जो आज शराब बंदी का विरोध कर रहे हैं. पहले शराब बंदी को नैतिक बताते थे और अब इस पर अनैतिक राजनीति करने लगे हैं.

Source:-Zee News

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Wednesday, 4 April 2018

पीएम मोदी का गरीबों के लिए सस्ते मकान का सपना खटाई में, पढ़ें क्‍या है वजह

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में 2021 तक गरीबों के लिए 25 लाख मकान बनाने का वादा किया था, लेकिन लैंड पूलिंग एक्ट में देरी और बार बार पॉलिसी बदलने से अब सस्ते मकान बनाने का सपना खटाई में पड़ता दिख रहा है. किसानों का आरोप है कि लैंडपूलिंग एक्ट में बदलाव करके बड़े बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है. 

अभी हाल में लैंड पूलिंग एक्ट में बदलाव करने से भूपिंद्र बजाड़ जैसे पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है. लैंड पूलिंग एक्ट में इन बदलावों से किसान नाराज है. मसलन 70 फीसदी जमीन एक साथ होनी चाहि. पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसान लैंड पूल नहीं कर सकते है. भूमि विकास शुल्क के नाम पर किसानों से करोड़ों रुपए वसूले जाएंगे और कंसोर्टियम बनाकर ही जमीन लैंड पूल की जा सकती है. 

लैंड पूलिंग एक्ट में हो रही देरी से किसान नाराज हैं. इसी के चलते बीजेपी सांसद उदित राज भी मंत्रालय को  चिट्टी लिखकर नाराजगी जता चुके हैं. लैंड पूलिंग एक्ट के तहत छोटे किसान मिलकर एक बड़ी जमीन का खाका डीडीए को देते और वो वहां आधारभूत ढांचा खड़ा करके मकान बनाने को मंजूरी देता, लेकिन अब नियम ऐसे बना दिए गए जिससे छोटे किसानों को अपनी जमीन बड़े बिल्डरों को देना मजबूरी होगी और इसकी निगरानी के बंदोबस्त न होने से कई तरह के फ्रॉड होने की गुंजाइश भी बनी रहेगी. 

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