वॉशिंगटन : अमेरिका के वॉशिंगटन में न्यूजियम ने एक समारोह में 2017 में मारे गए भारतीय पत्रकारों गौरी लंकेश और सुदीप दत्ता भौमिक सहित विभिन्न देशों के 18 दिवंगत मीडियाकर्मियों को ‘जर्नलिस्ट मेमोरियल’ में शामिल किया.
भारतीय पत्रकार गौरी लंकेश को भी किया गया याद
स्वतंत्र प्रेस के महत्व को समझने के लिए संग्रहालय न्यूजियम प्रतिवर्ष कुछ पत्रकारों का चयन करता है जिन्हें स्मारिका में शामिल किया जाता है. इन पत्रकारों की मृत्यु/हत्या दुनियाभर में मीडियाकर्मियों द्वारा उठाए जाने वाले खतरों को दर्शाती है. इस वर्ष स्मारिका में शामिल किए गए 18 नाम में से आठ महिलाओं के हैं. न्यूजियम ने एक संक्षिप्त विवरण में कहा, ‘‘गौरी लंकेश (55) पूरे भारत में जातिवाद और हिन्दू कट्टरवाद के खिलाफ अपने मुखर लेखों के लिए प्रसिद्ध थीं.’’
उसमें लिखा है कि पांच सितंबर, 2017 को गौरी अपने घर के मुख्य दरवाजे से कुछ कदम की दूरी पर खड़ी थीं, तभी बाइक सवार बदमाश वहां आकर रूके और उनके सीने तथा पेट में गोलियां मार दीं. गौरी की मौके पर ही मौत हो गई. न्यूजियम ने कहा है, ‘‘कार्यकर्ता और अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ की संपादक गौरी अक्सर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडे की आलोचना करती थीं. गौरी की हत्या का पूरे देश में विरोध हुआ. उनकी हत्या के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है.’’
सुदीप दत्ता के बारे में भी हुई चर्चा
सुदीप दत्ता भौमिक के बारे में न्यूजियम का कहना है कि उन्होंने त्रिपुरा के स्थानीय अखबार के लिए ‘पुलिस में भ्रष्टाचार’ की तहकीकात की थी. भौमिक को 21 नवंबर, 2017 को अर्द्धसैनिक बल के स्थानीय प्रमुख तपन देबबर्मा से मिलने को कहा गया. इससे एक सप्ताह पहले ही भौमिक ने बल के भीतर ‘भ्रष्टाचार’ के बारे में एक लेख लिखा था. मुलाकात के दौरान भौमिक और देबबर्मा में बहस हुई. बाद में देबबर्मा ने अपने अंगरक्षक को कथित रूप से आदेश दिया कि वह भौमिक को गोली मार दे. भौमिक की मौके पर ही मौत हो गयी.
भौमिक के संपादक के हवाले से न्यूजियम ने कहा, ‘‘सुदीप का एकमात्र अपराध यह था कि उसने कई वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा किया था, जिनमें देबबर्मा संलिप्त था.’’ उसने कहा कि भौमिक की हत्या के मामले में देबबर्मा और उनके अंगरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है.
Source:-ZEENEWS
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भारतीय पत्रकार गौरी लंकेश को भी किया गया याद
स्वतंत्र प्रेस के महत्व को समझने के लिए संग्रहालय न्यूजियम प्रतिवर्ष कुछ पत्रकारों का चयन करता है जिन्हें स्मारिका में शामिल किया जाता है. इन पत्रकारों की मृत्यु/हत्या दुनियाभर में मीडियाकर्मियों द्वारा उठाए जाने वाले खतरों को दर्शाती है. इस वर्ष स्मारिका में शामिल किए गए 18 नाम में से आठ महिलाओं के हैं. न्यूजियम ने एक संक्षिप्त विवरण में कहा, ‘‘गौरी लंकेश (55) पूरे भारत में जातिवाद और हिन्दू कट्टरवाद के खिलाफ अपने मुखर लेखों के लिए प्रसिद्ध थीं.’’
उसमें लिखा है कि पांच सितंबर, 2017 को गौरी अपने घर के मुख्य दरवाजे से कुछ कदम की दूरी पर खड़ी थीं, तभी बाइक सवार बदमाश वहां आकर रूके और उनके सीने तथा पेट में गोलियां मार दीं. गौरी की मौके पर ही मौत हो गई. न्यूजियम ने कहा है, ‘‘कार्यकर्ता और अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ की संपादक गौरी अक्सर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडे की आलोचना करती थीं. गौरी की हत्या का पूरे देश में विरोध हुआ. उनकी हत्या के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है.’’
सुदीप दत्ता के बारे में भी हुई चर्चा
सुदीप दत्ता भौमिक के बारे में न्यूजियम का कहना है कि उन्होंने त्रिपुरा के स्थानीय अखबार के लिए ‘पुलिस में भ्रष्टाचार’ की तहकीकात की थी. भौमिक को 21 नवंबर, 2017 को अर्द्धसैनिक बल के स्थानीय प्रमुख तपन देबबर्मा से मिलने को कहा गया. इससे एक सप्ताह पहले ही भौमिक ने बल के भीतर ‘भ्रष्टाचार’ के बारे में एक लेख लिखा था. मुलाकात के दौरान भौमिक और देबबर्मा में बहस हुई. बाद में देबबर्मा ने अपने अंगरक्षक को कथित रूप से आदेश दिया कि वह भौमिक को गोली मार दे. भौमिक की मौके पर ही मौत हो गयी.
भौमिक के संपादक के हवाले से न्यूजियम ने कहा, ‘‘सुदीप का एकमात्र अपराध यह था कि उसने कई वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा किया था, जिनमें देबबर्मा संलिप्त था.’’ उसने कहा कि भौमिक की हत्या के मामले में देबबर्मा और उनके अंगरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है.
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