लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन जारी रखने का इशारा करते हुए कहा कि वे भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई भी कुर्बानी देने को तैयार है. सपा अध्यक्ष अखिलेश ने कहा, 'बसपा के साथ हमारा गठबंधन 2019 में जारी रहेगा, अगर हमें कुछ सीटें छोड़नी, तो भी हम इसके लिए तैयार हैं. हमारा मकसद भाजपा की हार सुनिश्चित करना है.'
अखिलेश ने रविवार (10 जून) को मैनपुरी में आयोजित एक जनसभा में कहा ‘‘समाजवादियों का दिल बड़ा है. अगर दो चार सीटें आगे पीछे करनी होंगी और त्याग करना होगा तो करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि अब भाजपा को चिंता है कि हम इस काम को कैसे करेंगे. हम अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ इस काम को करेंगे, जो उनके (बसपा कार्यकर्ताओं) साथ खड़े रहेंगे और उन्हें सहयोग करेंगे.‘‘ ज्ञातव्य है कि प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने 10 जून को दावा किया था कि सपा और बसपा की दोस्ती ज्यादा नहीं चलेगी और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही इसका अंत हो जाएगा.
मालूम हो कि मार्च में हुए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा ने सपा का सहयोग किया था. इसके अलावा राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में भी दोनों दल करीब आये. कर्नाटक में मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में अखिलेश और बसपा प्रमुख मायावती पहली बार एक मंच पर नजर आये थे. हालांकि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को पेचीदा मसले के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर उत्तर प्रदेश में, जहां कई राजनीतिक दल मजबूत स्थिति में हैं.
Source:-ZEENEWS
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अखिलेश ने रविवार (10 जून) को मैनपुरी में आयोजित एक जनसभा में कहा ‘‘समाजवादियों का दिल बड़ा है. अगर दो चार सीटें आगे पीछे करनी होंगी और त्याग करना होगा तो करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि अब भाजपा को चिंता है कि हम इस काम को कैसे करेंगे. हम अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ इस काम को करेंगे, जो उनके (बसपा कार्यकर्ताओं) साथ खड़े रहेंगे और उन्हें सहयोग करेंगे.‘‘ ज्ञातव्य है कि प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने 10 जून को दावा किया था कि सपा और बसपा की दोस्ती ज्यादा नहीं चलेगी और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही इसका अंत हो जाएगा.
मालूम हो कि मार्च में हुए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा ने सपा का सहयोग किया था. इसके अलावा राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में भी दोनों दल करीब आये. कर्नाटक में मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में अखिलेश और बसपा प्रमुख मायावती पहली बार एक मंच पर नजर आये थे. हालांकि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को पेचीदा मसले के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर उत्तर प्रदेश में, जहां कई राजनीतिक दल मजबूत स्थिति में हैं.
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